कैस्परस्काई की स्टडी: ऐप्स यूज करने 4 में से 1 यूजर वेबकैम और माइक को देता है एक्सिस, 60% को कैमरा से दिखने को डर


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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ऐप्स का इस्तेमाल करने के लिए एक चौथाई यूजर्स अपने फोन के माइक और वेबकैम की अनुमति देते हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्काई ने 15,000 लोगों पर की गई ग्लोबल स्टडी से पता लगाया कि 4 में से 1 यूजर ऐसा करता है। हालांकि, वेबकैम सुरक्षा को लेकर यूजर्स ज्यादा अवेयर हैं।

स्टडी में 10 में से 6 लोग इस बात से चिंतित थे कि इनकी मर्जी के बिना वेबकैम की मदद से उन्हें देखा जा सकता है। 60% लोगों ने बताया कि मलिशियस सॉफ्टवेयर से इस काम को किया जा सकता है।

25 से 34 साल की उम्र वाले ज्यादा देते हैं ऐप को एक्सिस
स्टडी में पता चला कि कोविड-19 महामारी के बाद ज्यादातर लोगों ने वीडियो क्रॉन्फ्रेसिंग प्लेटफॉर्म्स को माइक और कैमरे का एक्सिस दिया है। क्योंकि इसकी मदद से लोग जहां बिजनेस कर रहे हैं, तो बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हो रही है। ये टूल्स अचानक आए डिजिटल चेंजेस के लिए सूत्रधार के तौर पर काम करते हैं। ऐप्स को ज्यादातर 25 से 34 साल की आयु वाले 27% लोग वेबकैम और माइक का एक्सिस देते हैं।

55 साल वाले कम देते हैं एक्सिस
55 साल या उससे अधिक उम्र वाले 38% यूजर्स ऐप्स या सर्विसेस को किसी तरह के एक्सिस नहीं देते। यानी कैमरा, माइक, गैलरी, कॉल, कॉन्टैक्ट जैसे दूसरे एक्सिस ऐप्स को नहीं दिए जाते।

अब यूजर सिक्योरिटी को लेकर अलर्ट हो रहे
कैस्परस्काई के कंज्यूमर प्रोडक्ट मार्केटिंग के हेड मरीना टिटोवा ने कहा कि कई लोग वेब कैमरा के उपयोग और साइबर सुरक्षा प्रक्रियाओं से संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल से परिचित नहीं हैं। हालांकि, अब हम जो देख रहे हैं वह ऑनलाइन सुरक्षा और संभावित खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक मजबूत सकारात्मक रुझान है। यह उपभोक्ता के अधिक सक्रिय व्यवहार को दिखाता है।

84% भारतीयों को प्राइवेट डेटा की सुरक्षा करने वाली फर्म पंसद
दुनियाभर सबसे ज्यादा भारतीय डेटा प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी के लिए इनसे जुड़ी ऑर्गनाइजेशन के साथ काम करते हैं। कनाडा स्थित इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट कंपनी ओपनटेक्स्ट द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, 84% भारतीय डेटा प्राइवेसी फर्म के साथ काम करते हैं। सर्वे के दौरान देश के 6000 लोगों से उनकी राय ली गई।

दूसरी तरफ, ब्रिटेन में 49%, जर्मनी में 41%, स्पेन में 36% और फ्रांस में 17% लोग डेटा प्राइवेसी फर्म के साथ काम करते हैं। यानी भारतीय अपनी डेटा प्राइवेसी पर ज्यादा ध्यान देते हैं।

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